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बाइल डक्ट (पित्त नलिका) के कैंसर आक्रामक होते हैं और अक्सर इनपर विकसित चरणों तक किसी का ध्यान नहीं जाता है। सकारात्मक नैदानिक परिणामों के साथ बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर का इलाज करने के लिए प्रारंभिक पहचान बहुत महत्वपूर्ण है।
बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर एक दुर्लभ प्रकार का कैंसर है जो बाइल डक्ट (पित्त नलिका) में शुरू होता है। पित्त नलिकाएं पतली नलिकाएं होती हैं जो लीवर (यकृत), गॉल्ब्लैडर (पित्ताशय) और छोटी आंत को जोड़ती हैं। बाइल डक्ट (पित्त नलिका) का प्राथमिक कार्य पित्त रस को लीवर (यकृत) से छोटी आंत में प्रवाहित होने देना है, जहां यह फैट (वसा) के पाचन और अवशोषण में सहायता करता है।
बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर आक्रामक होते हैं और अक्सर उन्नत चरणों में इनका पता चलता हैं। हालांकि, कुछ मामलों में प्रारंभिक पहचान संभव है।
सकारात्मक नैदानिक परिणामों के साथ बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर का इलाज करने के लिए प्रारंभिक पहचान और सटीक निदान महत्वपूर्ण हैं।
ट्यूमर बनने के स्थान के आधार पर, बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर को तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:
इंट्राहैपेटिक बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर लीवर (यकृत) के भीतर बाइल डक्ट (पित्त नलिका) की छोटी शाखाओं में बनता है। अक्सर हेपैटोसेलुलर कार्सिनोमा जो लीवर सेल्स (यकृत कोशिकाओं) में बनता है उसके साथ इंट्राहेपेटिक बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर का गलत निदान किया जाता हैं। दस में से एक बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर इंट्राहैपेटिक के रूप में रिपोर्ट किया जाता है।
इसे क्लात्स्किन ट्यूमर भी कहा जाता है, पेरिहिलर बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर लीवर (यकृत) के हिलम क्षेत्र में बनता है। ये कैंसर बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर का सबसे आम प्रकार हैं और हर दस बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर में से लगभग 6 से 7 मामलों में पेरिहिलर बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर होता हैं।
ये कैंसर बाइल डक्ट (पित्त नलिका) के निचले हिस्से में, छोटी आंत के पास बनते हैं। हर दस बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर में से 2 से 3 मामलों में डिस्टल बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर होता हैं। इन कैंसर को पेरिहिलर बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर के साथ एक्स्ट्राहैपेटिक बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर का अक्सर उन्नत चरणों में जब संकेत और लक्षण दिखाई देने लगते है तब पता चलता हैं। हालांकि, कुछ मामलों में, जल्दी निदान संभव है। यहाँ कुछ लक्षण बताए गए हैं जो बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर से जुड़े हैं:
बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर दुर्लभ होते हैं। हालांकि, कुछ ऐसे कारक हैं जो बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर के विकास के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
लंबे समय तक रहने वाली सूजन बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर से जुड़ा सबसे बड़ा जोखिम कारक है। जब दिर्घकालिक सूजन होती है, तब बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
पित्त नलिकाओं के घावों और कभी-कभी उनके नष्ट होने के कारण सूजन आती है।
रेक्टम (मलाशय) की परत और कोलोन (बृहदान्त्र) में अल्सर के गठन से बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर का जोखिम बढ़ता है।
यदि इसका उपचार नहीं किया जाताहै, तो यह बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर का कारण बन सकता है।
जो अक्सर शराब के सेवन और हेपेटाइटिस सी और बी जैसे संक्रमणों के कारण होता है, जिस वजह से लीवर (यकृत) पर घाव बनते है और यह बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है।
उम्र के साथ बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर का निदान होने वाले लगभग 60% लोग, 65 वर्ष से अधिक उम्र के हैं।
यह एक परजीवी संक्रमण है जो अधपकी मीठे पानी की मछली के सेवन से होता है।सेवन करने पर, यह परजीवी, लीवर फ्लूक, बाइल डक्ट (पित्त नलिकाओं) में रहता है और यदि इसका इलाज नहीं किया गया तो बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर हो सकता है। लिवर फ्लूक की कैंसर पैदा करने वाली प्रजातियां आमतौर पर दक्षिण पूर्व एशिया में पाई जाती हैं। अन्य जोखिम कारकों में बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर का पारिवारिक इतिहास, धूम्रपान और मधुमेह और पैन्क्रीअटाइटिस जैसी गंभीर चिकित्सा स्थितियां शामिल हैं।
बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर निदान करने के लिए सापेक्षित रुप से बहुत ही मुश्किल चिकित्सा स्थिति है। यदि बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर का संदेह है, तो निर्णायक निदान प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित परीक्षणों की सिफारिश की जा सकती है:
कैंसर कोशिकाएं (सेल्स) कुछ विशिष्ट रासायनिक घटकों को छोड़ती हैं, जिन्हें ट्यूमर मार्कर के रूप में जाना जाता है, जिनका रक्त परीक्षण के माध्यम से पता लगाया जा सकता है। इसलिए, बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर का संदेह होने पर रक्त परीक्षण की सिफारिश की जाती है। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये मार्कर अन्य स्थितियों में भी जारी किए जाते हैं, और रिपोर्ट में इन मार्करों की उपस्थिति का मतलब यह नहीं है कि यह बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर है और इसके विपरीत।
ट्यूमर के सटीक स्थान, आकार और विस्तार को निर्धारित करने के लिए अल्ट्रासाउंड, कम्प्यूटराइज़्ड टोमोग्राफी (सीटी) और चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग (मैग्नेटिक रेज़नन्स इमेजिंग - एमआरआई) जैसे स्कैन किए जाते हैं। इन स्कैन के परिणाम रोग के स्टेजिंग में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यह एक अनोखी इमेजिंग प्रक्रिया है जो एक्स-रे और एंडोस्कोप के उपयोग का संयोजन करती है। इस प्रक्रिया के दौरान, एक्स-रे स्कैन के माध्यम से बाइल डक्ट (पित्त नलिका) क्षेत्र को अधिक स्पष्ट रूप से देखने के लिए एक विशेष तरल इंजेक्ट किया जाता है। एक्स-रे स्कैनर एंडोस्कोपी (गले के माध्यम से) का मार्गदर्शन करता है, जो ब्लाकिज (रुकावटों), ट्यूमर की उपस्थिति या किसी अन्य असामान्यताओं का पता लगाने में मदद करता है।
ईआरसीपी परीक्षण का यह एक उन्नत रूप है, बाइल डक्ट (पित्त नलिका) में किसी भी असामान्यताओं की जांच करने के लिए, स्पाईग्लास विशेषज्ञ को एक विशेष एंडोस्कोप को बाइल डक्ट (पित्त नलिका) से पास करने की अनुमति देता है । स्पाईग्लास तकनीशियन को बायोप्सी के लिए सटीक रूप से नमूने इकठ्ठा करने की अनुमति भी देता है।
बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर के निदान की पुष्टि करने के लिए बायोप्सी की जाती है। इस प्रक्रिया के दौरान, कैंसर कोशिकाओं (सेल्स) की उपस्थिति की जांच करने के लिए बाइल डक्ट (पित्त नलिका) के ऊतक का छोटा सा नमूना निकाला जाता है और माइक्रोस्कोप (सूक्ष्मदर्शी) के तहत जांच की जाती है। कुछ मामलों में, आसपास के लिम्फ नोड्स के नमूने भी लिए जा सकते हैं ताकि यह जांचा जा सके कि कैंसर लिम्फैटिक सिस्टम (लसीका प्रणाली) में मेटास्टेसाइज (स्थानांतरित) हो गया है या नहीं।
बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर के लिए उपचार योजना ट्यूमर के प्रकार, रोग के चरण, आकार, मरीज़ की उम्र और मरीज़ की कुल स्थिति जैसे कई कारकों के आधार पर तैयार की जाती है। चरण 1 और चरण 2 के मामलों में, ट्यूमर को लीवर (यकृत) और गॉल्ब्लैडर (पित्ताशय) के कुछ हिस्सों के साथ सर्जरी के माध्यम से निकाला जा सकता है।
उन्नत चरण के कैंसर में, कितने लिम्फ नोड्स और अंग प्रभावित हुए हैं इस आधार पर उपचार की योजना बनाई जाएगी। कुछ मामलों में, मरीज़ों को लक्षणों से राहत देने और उनको बेहतर जीवन जीने में मदद करने के लिए रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी और सर्जरी की जाती है।
यदि ट्यूमर बाइल डक्ट (पित्त नलिका) को ब्लॉक (अवरोध) कर रहा है, तो डॉक्टर डक्ट (पित्त नलिका) को अनब्लॉक करने के लिए एक प्रक्रिया की सिफारिश कर सकते हैं। यह प्रक्रिया पीलिया, त्वचा में खुजली और पेट दर्द जैसे रोगों के लक्षणों को दूर करने में मदद कर सकती है। बाइल डक्ट (पित्त नलिका) को धातु या प्लास्टिक की एक छोटी ट्यूब का उपयोग करके अनब्लॉक किया जाता है जिसे स्टेंट कहा जाता है। इस स्टेंट का उपयोग बाइल डक्ट (पित्त नलिका) को चौड़ा करने और पित्त प्रवाह को बहाल करने के लिए किया जाता है। इसे एंडोस्कोपिक रेट्रोग्रेड कोलेजनोपैंक्रेटोग्राफी (ईआरसीपी) के माध्यम से डाला जा सकता है। स्टेंट डालने के लिए पर्क्यूटेनियस ट्रांसहैपेटिक कोलेजनियोग्राफी (पीटीसी) प्रक्रिया का भी उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान स्टेंट डालने और पित्त प्रवाह को बहाल करने के लिए पेट में छोटे चीरे लगाए जाते हैं।
कैंसर के रिलैप्स (पुनरावर्तन) के जोखिम को कम करने के लिए सर्जरी के बाद रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी को सहायक चिकित्सा के रूप में प्रशासित किया जा सकता है। बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर मरीज़ों में लक्षणों को दूर करने और रोग के विकास में देरी के लिए भी इस उपचार का उपयोग किया जाता है।
रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) की तरह, कीमोथेरेपी भी रिकरन्स (पुनरावर्तन) के जोखिम को कम करने के लिए उपशामक चिकित्सा के रूप दी जा सकती है, या रोग के विकास में देरी करने और रोग से जुड़े लक्षणों से छुटकारा पाने के लिए सहायक चिकित्सा के रूप में भी दी जा सकती है।
बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर के मरीज़ों में ट्यूमर को सिकोड़ने के लिए फोटोडायनामिक थेरेपी का अनोखा तरीका अपनाया जाता है। यह प्रक्रिया बीमारी से जुड़े लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद करती है, लेकिन इलाज में नहीं। यह कैंसर की कोशिकाओं (सेल्स) को प्रकाश के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है, और बाद में ट्यूमर को सिकोड़ने के लिए एंडोस्कोप के माध्यम से लेजर को पारित किया जाता है।यह उपचार रोग से जुड़े लक्षणों को कम करने और मरीज़ों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करता है।
यदि आपको बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर का निदान होता है तो निम्नलिखित कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न हैं जो आपको अपने ऑन्कोलॉजिस्ट से पूछने चाहिए :
बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर का इलाज संभव हैं। हालांकि, सकारात्मक नैदानिक परिणामों के लिए शुरुआती पहचान और सटीक निदान महत्वपूर्ण हैं। उपचार योजना ट्यूमर के प्रकार, रोग का चरण, मरीज़ की उम्र और मरीज़ की कुल स्थिति के आधार पर बनाई जाती है। मरीज़ के साथ उपचार योजना और पूर्वानुमान के बारें में चर्चा की जाएगी ताकि वे जान सकें कि उपचार से क्या उम्मीद की जा सकती है।
बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर का अक्सर लीवर (यकृत) कैंसर के रूप में गलत निदान किया जाता है। पित्त नलिकाएं पतली ट्यूब होती हैं जो एक नेटवर्क बनाती हैं और लीवर (यकृत), गॉल्ब्लैडर (पित्ताशय) और छोटी आंत को जोड़ती हैं। बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर वे होते हैं जो इन नलियों में उत्पन्न होते हैं, जबकि लीवर (यकृत) कैंसर लीवर सेल्स (यकृत कोशिकाओं) में उत्पन्न होते हैं।
पित्त की पथरी वाले सभी मरीज़ों में बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर नहीं होता है। हालांकि, यह जानना महत्वपूर्ण है कि पित्त की पथरी सूजन पैदा कर सकती है, जिसे अगर नजरअंदाज किया जाए तो बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर के विकास का खतरा बढ़ सकता है।
शराब का अधिक सेवन सिरोसिस का कारण बनता है, जो इंट्राहिपैटिक बाइल डक्ट (पित्त नलिका) कैंसर के जोखिम कारकों में से एक है। तो हाँ, शराब का सेवन बाइल डक्ट (पित्त नलिका) के कैंसर के जोखिम कारकों में से एक है।